नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना, जिसे 2023 में मंजूरी दी गई है, ने महाराष्ट्र के किसानों के बीच हलचल पैदा कर दी है। इस परियोजना में नागपुर और गोवा के बीच से गुजरने वाले कई जिलों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। कोल्हापुर, सोलापुर, सांगली, सिंधुदुर्ग, यवतमाल, वर्धा, बीड, परभणी, हिंगोली, नांदेड़, धाराशिव और लातूर सहित 12 जिलों के किसान शक्तिपीठ हाईवे परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के12 जिलों के हजारों किसानों ने बुधवार (12 मार्च, 2025) को मुंबई के आज़ाद मैदान में मार्च किया। कोल्हापुर, सोलापुर, सांगली, सिंधुदुर्ग, यवतमाल, वर्धा, बीड, परभणी, हिंगोली, नांदेड़, धाराशिव और लातूर के 12 जिलों के किसान शक्तिपीठ हाईवे परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। किसान संगठनों से लेकर विपक्ष और सत्ताधारी दोनों दलों के विधायकों का विरोध प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। परियोजना से प्रभावित होने वाले हजारों किसान बुधवार को विरोध करने के लिए मुंबई में एकत्र हुए और घोषणा की कि अधिग्रहण के उद्देश्य से भूमि माप के लिए अधिकारियों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विपक्षी एनसीपी (सपा) विधायक जयंत पाटिल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “सरकार एक भी किसान की मांग के बिना यह सड़क बना रही है। सरकार ने पार्टी फंड जुटाने और ठेकेदारों को खिलाने का यह नया तरीका अपनाया है, जिसका बोझ हम सब पर डाल दिया है।” कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल ने कहा, “यह राजमार्ग ठेकेदारों के लिए बनाया जा रहा है। यह सरकार वही काम कर रही है, जो ठेकेदार चाहते हैं।” वहीं, किसानों के प्रतिनिधि और पूर्व सांसद राजू शेट्टी (Raju Shetti) ने सरकार पर ₹86,000 करोड़ की परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूछा, “अगर परियोजना महाराष्ट्र के मंदिरों को जोड़ने के लिए है, तो सड़क को गोवा क्यों ले जाया जा रहा है।”

पूर्व सांसद और किसान नेता राजू शेट्टी ने कहा, “नागपुर से रत्नागिरी तक एक समानांतर सड़क आज भी अस्तित्व में है। लेकिन, इस सड़क पर यातायात इतना कम है कि यह घाटे में चल रही है। ऐसे समय में जब एक किलोमीटर सड़क की लागत 35 करोड़ रुपये है, वहीं शक्तिपीठ सड़क की प्रति किलोमीटर लागत 107 करोड़ रुपये होगी। जब राज्य सरकार कर्ज में डूबी हुई है, तो यह परियोजना उस पर और बोझ बढ़ाएगी।” आजाद आजाद मैदान में प्रदर्शन के दौरान किसानों से बात करते हुए शेट्टी ने सवाल किय, “सरकारी कार्यालयों से मिली जानकारी के आधार पर मेरे अध्ययन के अनुसार, मैंने गणना की कि प्रस्तावित छह-लेन सड़क के एक किलोमीटर की लागत ₹35 करोड़ है, लेकिन सरकार ने ₹107 करोड़ का अनुमान लगाया है। हम पूछना चाहते हैं कि उपरोक्त ₹70 करोड़ किसके लिए हैं?”

शक्तिपीठ हाईवे के लिए लड़ाई जारी रखने के लिए हाल ही में 8 अप्रैल को लातूर में एक सभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। हर जिले में सभा करने और स्थानीय प्रतिनिधियों और मंत्रियों से जवाब मांगने के लिए घर-घर मार्च करने और सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए खेतों में काले झंडे लगाने का फैसला किया गया।

इस सड़क परियोजना को विदर्भ और मराठवाड़ा में काफी समर्थन मिला है, लेकिन सांगली और कोल्हापुर जिलों में विरोध का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि, यहां पर्यावरणीय प्रभाव और कृषि भूमि के नुकसान को लेकर लोगों के बीच चिंता बनी हुई है। हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि वह इन सभी मुद्दों को हल करने के लिए तेजी से काम कर ही है।