कश्मीर में हालिया बाढ़ और आपूर्ति संकट ने देशभर के सेब बाजार की तस्वीर बदल दी है। कश्मीर से आपूर्ति बाधित होने के कारण हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को इस समय जबरदस्त फायदा मिल रहा है।
शिमला के भट्टाकुफर फल मंडी में नीलामी के दौरान रॉयल डिलीशियस सेब का दाम 20 किलो के डिब्बे पर 2,300 से 2,400 रुपये तक पहुंच गया है। पहले यही डिब्बा केवल 1,700 से 1,900 रुपये में बिकता था। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र के व्यापारी सीधे बागवानों से सेब खरीद रहे हैं और बिचौलियों को दरकिनार कर रहे हैं।
सेब उत्पादक निशु वर्मा (थियोग) ने कहा, “कीमतें फिलहाल ऊंची हैं, लेकिन कश्मीर से आपूर्ति बहाल होते ही यह सामान्य हो जाएंगी। तब तक हम इस मौके का भरपूर लाभ ले रहे हैं।”
हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) के प्रबंध निदेशक हेमिस नेगी के मुताबिक, अब तक 1.61 करोड़ सेब के डिब्बे राज्य की मंडियों तक पहुंच चुके हैं। इनमें से 1.02 करोड़ डिब्बे शिमला और किनौर की मंडियों में पहुंचे हैं, जबकि 23.45 लाख डिब्बे सोलन की कृषि मंडियों में दर्ज हुए हैं।
रेलवे ने भी स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाया है। कश्मीर के बडगाम से दिल्ली के आदर्श नगर तक नई रेल सेवा शुरू की गई है, जिसमें दो डिब्बे केवल सेब की ढुलाई के लिए आरक्षित होंगे। इससे मैदानी इलाकों में आपूर्ति तेज होगी।
भट्टाकुफर मंडी में सेब लाने वाले वाहनों की संख्या में भी उछाल आया है। पहले जहां प्रतिदिन 30–40 गाड़ियां आती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 195 गाड़ियां हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि असली उच्च गुणवत्ता वाला सेब—खासकर शिमला और किनौर के ऊपरी इलाकों से—अगले दो से तीन हफ्तों में बाजार तक पहुंचेगा।
निष्कर्ष: जब तक कश्मीर की आपूर्ति पटरी पर नहीं लौटती, हिमाचल के सेब किसानों को ऊंचे दामों का फायदा मिलता रहेगा।