एशियाई तेल बाजार में रूसी कच्चे तेल के दामों में एक बार फिर तेज गिरावट आई है। भारत और चीन—जो रूस के सबसे बड़े खरीदार हैं—ने हाल के दिनों में तेल आयात घटा दिया है, जिसके चलते रूस को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर डिलीवरी के लिए रूस के यूराल्स क्रूड पर करीब 4 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट मिल रहा है, जो ब्रेंट क्रूड के मुकाबले लगभग दोगुना है। यह पिछले एक साल में सबसे बड़ी छूट है।
भारतीय रिफाइनर्स ने नए ऑर्डर रोके
अमेरिका द्वारा रूसी ऑयल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद भारत की प्रमुख ऑयल कंपनियों—एचपीसीएल, बीपीसीएल, मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी, और रिलायंस इंडस्ट्रीज—ने दिसंबर डिलीवरी के लिए नए ऑर्डर रोक दिए हैं।
ये कंपनियां भारत के कुल रूसी तेल आयात का करीब 65% हिस्सा संभालती हैं।
चीन ने भी घटाई खरीद
भारत की तरह चीन की सरकारी ऑयल कंपनियों ने भी रूस से समुद्री मार्ग से आने वाले तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी है। इससे ईएसपीओ ब्लेंड ऑयल के दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
एनालिस्ट्स के अनुसार, एशिया का रूसी तेल बाजार अब दो हिस्सों में बंट गया है—गैर-प्रतिबंधित कंपनियों का तेल प्रीमियम पर बिक रहा है, जबकि प्रतिबंधित स्रोतों से आने वाला तेल भारी डिस्काउंट पर उपलब्ध है।
रूस की अर्थव्यवस्था पर असर
भारत और चीन की घटती मांग से रूस के राजस्व पर बड़ा असर पड़ सकता है। तेल निर्यात रूस की अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है, और मौजूदा स्थिति उसके लिए चुनौतीपूर्ण हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती छूट और घटती मांग से मॉस्को की कमाई पर सीधा प्रहार हो सकता है—खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा प्रस्तावित है और अमेरिका दोनों देशों पर रूसी तेल खरीद सीमित करने का दबाव बढ़ा रहा है।