पंजाब के कई जिलों में हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों को बाहर निकालने के ऐलान ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। होशियारपुर जिले के 20 से अधिक सरपंचों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे बाहरी लोगों को निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं करेंगे। जिले में एक पांच साल के बच्चे के साथ कुकर्म और हत्या की घटना के बाद यह माहौल और गर्माया। इससे पहले गुरदासपुर समेत कई जिलों से भी ऐसी खबरें आ चुकी हैं।

जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी नागरिक को किसी भी राज्य में जाकर काम करने और रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि कोई कानून तोड़ेगा तो उसे सख्त सजा मिलेगी, लेकिन किसी को भी उसकी पहचान या प्रदेश के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए।

मान का बयान

एनडीटीवी से बातचीत में भगवंत मान ने कहा:

“पंजाबी सबसे ज्यादा विदेशों में रहते हैं। कनाडा में हमारे लोग मंत्री तक बने हैं। दुनिया के कई देशों—ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन—में यह बहस चलती रहती है कि ये लोग क्यों आए हैं और उन्हें बाहर निकालो। लेकिन हमारा मानना है कि यदि कोई कानून तोड़े तो उसे सख्त सजा मिले। कानून तोड़ने वाला किसी समुदाय का नहीं होता। सजा भी फास्ट ट्रैक पर होनी चाहिए।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ और कोलकाता में पंजाबियों का ट्रांसपोर्ट बिज़नेस है, मुंबई में भी पंजाबियों का बहुत बड़ा कारोबार है।

“गुस्सा लोगों के दिलों में हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी को प्रदेश के आधार पर निशाना बनाया जाए। पंजाब सरकार सुरक्षा देने को तत्पर है,” मान ने कहा।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहलगाम आतंकी हमले के समय पंजाब ने कश्मीरियों को सुरक्षा दी थी।

“अगर कोई प्रदेश का कानून तोड़ेगा तो सख्त सजा मिलेगी और हमारी उसमें कोई हमदर्दी नहीं होगी।”

राजनीतिक कटाक्ष

अपने ही एक विधायक पर रेप केस और एनकाउंटर मामले पर उन्होंने कहा:

“हमने तो सारे अच्छे लोग चुने थे, लेकिन कुछ खराब निकल आए तो क्या करें।”

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा:

“भाजपा के लोगों से यह सवाल पूछिए। वहां जिन लोगों पर केस होते हैं, वही पार्टी में आकर सही हो जाते हैं। भाजपा के पास पंजाब में नेता ही नहीं हैं। यहां उनके मुख्य नेता कांग्रेस से आए हुए हैं—रवनीत बिट्टू, अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और मनप्रीत बादल—all have switched parties before joining BJP.”

भगवंत मान के इस बयान से स्पष्ट है कि वे कानून व्यवस्था पर सख्ती और कामगारों की सुरक्षा दोनों को संतुलित करना चाहते हैं।