पंजाब सरकार ने बाढ़ से प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 8 सितंबर को कैबिनेट बैठक के बाद घोषणा की कि जिन किसानों की फसलें और खेत बाढ़ में बर्बाद हुए हैं, उन्हें 20,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नदी किनारे रहने वाले किसानों को अपने खेतों में जमी रेत-बालू को बेचने के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति या एनओसी की आवश्यकता नहीं होगी। यह अनुमति 15 नवंबर तक दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे किसान न केवल राहत पा सकेंगे बल्कि अपने खेतों को आगामी रबी फसल के लिए उपजाऊ भी बना सकेंगे।
पंजाब इस समय पिछले 40 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ झेल रहा है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के उफान से राज्य के करीब 2,000 गांव और 4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री मान ने मोहाली के एक निजी अस्पताल से लाइव प्रसारण के जरिए यह जानकारी दी। वह 5 सितंबर से थकान और धीमी हृदय गति के कारण अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन कैबिनेट बैठक में वहीं से शामिल हुए।
सरकार ने अन्य राहत उपायों की भी घोषणा की है—
•जिन परिवारों ने बाढ़ में अपने सदस्य खोए हैं, उन्हें 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
•बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों को अगले 6 महीने तक न तो किस्त देनी होगी और न ही ब्याज।
•जिन किसानों का पशुधन बाढ़ में नष्ट हुआ है, उनकी मदद के लिए अलग सर्वे किया जाएगा।
•नुकसान का निष्पक्ष आकलन करने के लिए विशेष सर्वे कराया जाएगा, जिसके आधार पर पूरी भरपाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि “जिसदा खेत, उसदी सैंड” नीति के तहत यह कदम किसानों को सीधा लाभ पहुंचाएगा और उनकी आजीविका को फिर से पटरी पर लाने में मदद करेगा।